फिल्म 'एक दिन' रिव्यू : लॉजिक से परे लेकिन खूबसूरत ‘एक दिन’, जानिए जुनैद और साई की फिल्म में कहां रह गई कमी?

ਮਨੋਰੰਜਨ Fri, 01 May 2026 02:31 PM


फिल्म 'एक दिन' रिव्यू : लॉजिक से परे लेकिन खूबसूरत ‘एक दिन’, जानिए जुनैद और साई की फिल्म में कहां रह गई कमी?

फिल्म 'एक दिन' रिव्यू
एक दिन
कलाकार
जुनैद खान , साई पल्लवी और कुणाल कपूर
लेखक
स्नेहा देसाई और स्पंदन देसाई
निर्देशक
सुनील पांडे
निर्माता
आमिर खान , मंसूर खान और अपर्णा पुरोहित
रिलीज
1 मई 2026
रेटिंग
 2.5/5
विस्तार
वो सपने ही क्या जो पहुंच के बाहर ना हो? और अगर सपने पूरे नहीं कर सकते तो सपने देखने का क्या ही मतलब है? खुद को कमतर समझने का वाला एक लड़का जिसे एक खूबसूरत सी लड़की से सिर्फ एक दिन बात ही करने को मिल जाए, ऐसे सपने देखता है। उसका यह सपना कैसे पूरा होता है और जब टूटता है ताे क्या होता है? बस यही है ‘एक दिन’ की कहानी…
फ्रेश ऑनस्क्रीन कपल.. जापान की खूबसूरत लोकेशन और एक मासूम सी प्रेम कहानी… सुनने में तो यह सब बहुत अच्छा लगता है। पर जब यह सब मिलकर स्क्रीन पर आता है तो कुछ अधूरा सा लगता है। कहानी और ढीले स्क्रीनप्ले की वजह से फिल्म कई जगह कमजोर पड़ती है पर फिर अपने आप ही संभल जाती है। कैसी है यह फिल्म? यहां जानिए..
कहानी
सीधी साधी सी है। दिनेश (जुनैद खान) जिस कंपनी में काम करता है उसी कंपनी में मीरा (साई पल्लवी) भी काम करती है। दिनेश, खुद को कमजोर समझता है। उसे लगता है कि उसकी कोई वैल्यू नहीं है और ना ही वो किसी को दिखाई देता है। वो खुद को ‘इनविजिबल मैन’ समझता है। उसे मीरा से एकतरफा प्यार है पर उसे बताने से कतराता है। इसी बीच कंपनी का बॉस नकुल (कुणाल कपूर) पूरी ऑफिस टीम को लेकर जापान ट्रिप पर जाता है। यहां मीरा के साथ एक हादसा होता है और उसकी याददाश्त एक दिन के लिए चली जाती है। इसके बाद दिनेश, मीरा के साथ ‘एक दिन’ बिताता है और कई झूठ बोलता है। ट्विस्ट तब आता है जब मीरा को सच का पता चलता है। इसके आगे क्या होता है? यह जानने के लिए आप फिल्म देख सकते हैं।
निर्देशन
फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी है इसका धीमापन और कई ऐसी चीजें जो लॉजिक से परे हैं। फर्स्ट हाफ तो निर्देशक सुनील पांडे ने अच्छे से संभाला है पर सेकंड हाफ में जबरदस्ती खींचे गए इमोशंस फिल्म को बेवजह लंबा कर देते हैं। एक वक्त मात्र दो घंटे की यह फिल्म भी आपको बोर करने लगती है क्योंकि इसमें वो मसाला ही नहीं, जिसे आज के दौर में दर्शक देखने के आदी हो गए हैं। फिल्म में हीरो का इंट्रो अलग और थोड़ा साॅफ्ट है, जो अच्छा लगता है। एक दो अच्छे पंच भी हैं जिन्हें सुनकर दर्शक हंसते भी दिखते हैं। जैसे - ‘जिस हिसाब से ये तुम्हारा ख्याल रख रखा है ये तुम्हारा पति हो भी नहीं सकत

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